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Oral Sex Tips In Hindi

Oral Sex Tips In Hindi – ऑरल सेक्स को भारत में घृणित और निंदनीय समझा जाता है, लेकिन इसके बावजूद लोग इसे कभी ना कभी आजमाते जरूर हैं। इसके बारे में यह भी कहा जाता है कि इससे कैंसर भी हो सकता है। तो आईये जानते है कुछ ऑरल सेक्स के बारे में, लोग इसके बारे में क्या कहते हिया और सुर्वे क्या कहते है है ऑरल सेक्स के बारे में|

1. दुनियाभर के सेक्स संबंधी आंकड़े दर्शाते हैं कि कहीं इसका प्रचलन कम है तो कहीं बहुत अधिक है। जहां तक अमेरिका की बात है तो ज्यादातर अमेरिकी अपनी किशोरावस्था में या किशोरावस्था के प्रारंभिक वर्षों में इसका अनुभव ले चुके होते हैं।

2. वर्ष 2006 और 2008 के बीच कराए गए सीडीसी सर्वे के मुताबिक कभी आधे किशोरों और करीब 90 फीसदी युवाओं ने अपने विषमलिंगी साथी के साथ ऑरल सेक्स किया। इन युवाओं की आयु 25 वर्ष से लेकर 44 वर्ष तक थी।

3. सेक्स विशेषज्ञों के अनुसार यह सेक्स किए बिना सेक्सी होने का अनुभव है। एक विशेषज्ञा लिंडसे पाल्मर का कहना है कि आप अपनी सेक्स लाइफ में सुधार लाने के लिए भी एक ब्रेक के तौर पर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
उनका कहना है कि ऑरल सेक्स भी वयस्क रिश्तों का एक सुखद और स्वस्थ भाग हो सकता है लेकिन कुछ ऐसी बातें हैं जिनके बारे में अधिक लोग नहीं जानते। इसके बारे में चार तथ्य हैं जो आपको चकित कर सकते हैं।

4. ऑरल सेक्स का गले के कैंसर से संबंध : आमतौर पर यह कहा और माना जाता है कि ऑरल सेक्स करने से गले का कैंसर हो जाता है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के चीफ मेडिकल ऑफीसर ओटिस ब्रॉली, एमडी का कहना है कि हां, यह संभव है कि आपको ओरल सेक्स करने से गले का कैंसर हो सकता है।
पर यह बात भी सही है कि ओरल सेक्स से कैंसर नहीं भी होता है। दरअसल कैंसर का कारण ह्यूमन पापीलोमावाइरस (एचपीवी) होता है जो सेक्स के दौरान एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में पहुंच जाता है और इस सेक्स में ऑरल सेक्स भी शामिल है।

5. शोधकर्ताओं ने यह पाया है कि कुछ तरह का कैंसर जो गले के बीच के भाग (ओरोफैरिंक्स) और टॉंसिल्स में एचपीवी के एक निश्चित प्रकार के वाइरस से होता है। इसके साथ यह भी जान लें कि एचपीवी बहुत ही सामान्य होता है और यह हमेशा ही कैंसर पैदा नहीं करता है।

इसके बारे में एक प्रमुख बात यह भी है कि एचपीवी के संक्रमण को मनुष्य के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता ही समाप्त कर देती है और शरीर इसके संक्रमण से वर्षों तक लड़ सकता है, लेकिन यह बात भी तय है कि अगर आप ओरल सेक्स के दौरान एचपीवी के सम्पर्क में नहीं आते हैं और इससे बचाव का उपाय करते हैं तो कैंसर होने का कोई खतरा नहीं होता है।

ब्रॉली का कहना है कि अस्सी के दशक के अंतिम वर्षों और नब्बे के दशक की शुरुआत में एचपीवी और ओरोफैरिंगियल कैंसर के बीच संबंध का इशारा मिला था। शोधकर्ताओं ने इस बात पर गौर किया कि इस तरह के कैंसर की बढ़ोतरी ऐसे लोगों में देखी गई थी जो इस तरह की बीमारी के प्रति बहुत प्रोन नहीं थे। इस बीमारी ने ऐसे लोगों को करीब 40 वर्ष की उम्र के करीब घेरा था हालांकि ये ऐसे लोग थे, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया था और ना ही कभी शराब पी थी।

इससे पहले के दशकों में यह देखा गया था कि इस तरह के कैंसर आमतौर पर उन्हीं बूढ़े लोगों में पाए जाते थे जो धूम्रपान करते थे या बहुत शराब पीते थे। वर्ष 2000 की शुरुआत में वैज्ञानिकों ने एचपीवी 16 का अत्याधुनिक डीएनए परीक्षण किया और पाया इनमें से कई नए तरह के कैंसर थे। ब्रॉली का मानना था कि बीमारी से यौन संबंध जुड़े हो सकते हैं।

वर्ष 2007 में द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में एक अध्ययन प्रकाशित किया गया जिसमें कहा गया था कि ऐसे लोगों में ओरोफैरिंगियल कैंसर का ज्यादा खतरा था जिनके ऑरल सेक्स के दौरान कम से कम छह अलग-अलग साथी थे। एचपीवी टाइप 16 के डीएनए सिग्नेचर (विशेषता) अक्सर ऐसे लोगों में पाया गया, जिनके बहुत सारे सेक्स पार्टनर्स थे।
लेकिन ब्रॉली का कहना है कि अभी भी यह बात स्पष्ट नहीं है कि कितने लोगों को ऑरल सेक्स से एचपीवी थ्रोट इन्फेक्शन्स होता है या फिर इनमें से कितने लोगों को ओरोफैरिंगियल कैंसर होता है। महिला और पुरुष दोनों को ही गले में एचपीवी इन्फेक्शन (संक्रमण) हो सकता है, लेकिन जिन लोगों को यह समस्या सबसे कम होने की संभावना थी वे 40-50 वर्ष की उम्र के विष‍मलिंगी पुरुष थे।
डॉक्टर्स यह बात अच्‍छी तरह जानते हैं कि एचपीवी से होने वाला ओरोफैरिंगियल कैंसर का इलाज बहुत आसान होता है अगर इससे पीड़ित लोग धूम्रपान और शराब पीने से दूर रहें। ब्रॉली कहते हैं कि इस मामले में सर्वश्रेष्ठ रोकथाम का उपाय भी स्पष्ट नहीं है लेकिन सार्वजनिक जागरूकता के तौर पर लोगों को निश्चित तौर पर इस बात की जानकारी होनी चाहिए।

डॉ. ब्रॉली कहते हैं कि ऐसी स्थिति में एचपीवी वैक्सीन का उपयोग समस्या का एक हल हो सकता है, लेकिन वे इस बात को लेकर सुनिश्चित नहीं हैं कि हमने इतना अध्ययन कर लिया है कि हम यह मान लें कि यही एक कारण है जिसके चलते लड़कों को एचपीवी के वैक्सीन लगा देने चाहिए।

अमेरिका में एफडीए की ओर से एचपीवी वैक्सीन गार्डासिल 9 वर्ष से लेकर 26 वर्ष तक के युवाओं के लिए मिलती है लेकिन इससे भी लड़कों और युवाओं के जननांगों में होने वाले मस्सों का इलाज होता है और इससे उनके साथियों से होने वाले एचपीवी संक्रमण को नहीं रोका जा सकता है, पर विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तव में 9 वर्ष तक के लड़कों को गार्डासिल की जरूरत नहीं होती है।

कुछ के संबंध सुधरे तो कुछ को तनाव : फेयर ओक्स, कैलिफोर्निया की सेक्स थेरेपिस्ट लुआन कोल वेस्टन का कहना है कि वयस्कों में जहां ओरल सेक्स कुछ जोड़ों को तनाव देता है तो कुछ के लिए अंगरंगता बढ़ाता है। वे कहती हैं कि ओरल सेक्स को लेकर तनाव का कारण है कि एक साथी को स्वास्थ्य विज्ञान (हाइजीन) से जुड़ी कुछ चिंताएं होती हैं। वेस्टन कहती हैं कि एक व्यक्ति इसे नहीं करना चाहेगा क्योंकि वह दूसरे साथी की प्रतिक्रिया को लेकर चिंतित होता है।
इसमें कुछ लोगों को अपनी परफॉर्मेंस (प्रदर्शन) को लेकर भी चिंता हो सकती है। उन्हें चिंता हो सकती है कि वे इससे अपने साथी को खुश कर पाएंगे या नहीं और क्या दूसरा साथी इसे करने में उसके जैसी ही रुचि दिखा रहा है या नहीं?

वेस्टन कहती हैं कि कुछ लोग ऐसे नहीं होते हैं जो इसे सामान्य तौर पर ले पाते हों। कुछ लोग इसे नहीं करना चाहते क्योंकि वे इस काम में खुद को एक हद तक दूसरे के अधीन महसूस करते हैं। कुछ लोगों को लगता है कि एक व्यक्ति के शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग उनके दांतों के नीचे होता है और उन्हें लगता है कि ऐसा करके वे दूसरे के सामने झुक रहे हैं।

वेस्टन का कहना है कि जबकि दूसरे लोगों के लिए ऑरल सेक्स का अनुभव रिश्ते को मजबूत करने वाला और बहुत ही अंतरंग संबंध होता है जिसे दोनों लोग साझा करते हैं। इसके दौरान अपने साथी को भी देखा जा सकता है और उन्हें लगता है कि वे वास्तव में बहुत ही निजी दौर में हैं।

असुरक्षित ऑरल सेक्स सामान्य लेकिन जोखिमभरा : बहुत सारी सेक्स से संक्रमित होने वाली बीमारियां (एसटीडीज) जिनमें एचआईवी, दाद-खाज, सिफलिस, गोनरिया और वाइरल हेपाटाइटिस, ऑरल सेक्स के जरिए एक-दूसरे में फैलती हैं। पोर्टलैंड, ओरेगान में वेस्टोवर हाइट्‍स क्लीनिक की मालकिन टेरी वारेन का कहना है, ऑरल सेक्स सुरक्षित नहीं होता है। यह दूसरों की तुलना में अधिक सुरक्षित हो सकता है लेकिन यह सुरक्षित नहीं है।

पर इस तरह का खतरा बहुत सारी बातों पर निर्भर करता है। जैसे आपके कितने सेक्सुअल पार्टनर्स हैं, आपका लिंग क्या है, आप ऑरल सेक्स में भी कौनसी क्रिया ज्यादा करते हैं। इस दौरान कंडोम का इस्तेमाल या सुरक्षा के अन्य उपाय किए जा सकते हैं।

वारेन का कहना है कि ज्यादातर लोग ऑरल सेक्स के दौरान सुरक्षा का कोई उपाय नहीं करते है, पर अपने को सुरक्षित सामान्य समझदारी की बात है और बहुत सारे सेक्सुअल सक्रिय किशोरों और वयस्कों के मध्य किए जाने वाले सर्वेक्षणों में बार-बार यही बात कही जाती है।
यह स्थिति इस कारण से है क्योंकि बहुत सारे लोग इस बात को नहीं जानते हैं कि सेक्स जनित बीमारियां मुंह से भी फैल सकती हैं। अगर वे जानते हैं तो इसे स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा नहीं मानते हैं।

वारेन की सलाह कि ऑरल सेक्स को बिना सुरक्षा के नहीं करें। वे कहती हैं कि किसी महिला के लिए पुरुष साथी के साथ बिना कंडोम के ऑरल सेक्स करना अधिक जोखिमभरा है। वे कहती हैं कि जो लोग एक कंडोम के बिना विभिन्न पुरुष साथियों के साथ ऑरल सेक्स करते हैं, वे भी कम जोखिम मोल नहीं ले रहे हैं।
वे कहती हैं कि अगर एक पुरुष एक महिला के साथ ऑरल सेक्स कर रहा है तो मैं इसे कम जोखिम वाला अनुभव मानती हूं, लेकिन अगर एक महिला के नियमित साथी को मुंह में कोई संक्रामक बीमारी है तो यह पूरी तरह से अलग बात हो सकती है।

किशोरों के मध्य आम है ऑरल सेक्स : अमेरिका में बहुत से किशोर योनि सहवास से पहले ऑरल सेक्स का अनुभव करते हैं और वे इसे जोखिमभरा भी नहीं मानते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सान फ्रांसिस्को की पीडियाट्रिक्स की एक प्रोफेसर बोनी हापर्न-फेल्शर कहती हैं कि किशोर इस बात को कोई बड़ी बात नहीं मानते हैं।
हापर्न-फेल्शर ने बहुत सारे सर्वेक्षण किए हैं जिनसे यह बात उजागर हुई है ज्यादातर किशोरों का यह मानना था कि ऑरल सेक्स करने से उन्हें सामाजिक, भावनात्मक या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने का खतरा नहीं है।

उनके अन्य सर्वेक्षणों से यह बात सामने आई कि जिन किशोरों ने केवल ऑरल सेक्स किया था, वे भी दूसरे किशोरों की तुलना में जोखिम उठा रहे थे, जिन्होंने वैजिनल सेक्स अथवा वैजिनल और ऑरल सेक्स किया था।

लेकिन सेक्सुअली सक्रिय किशोरों के तीनों वर्गों के मध्य सेक्स से होने वाली संक्रामक बीमारियां हुईं। जिन किशोरों ने कहा कि वे केवल ऑरल सेक्स करते हैं, उनमें से दो फीसदी से कम किशोर प्रभावित हुए। जो केवल वैजिनल सेक्स करते थे उनमें से करीब 5 फीसदी प्रभावित हुए लेकिन जो वैजिनल और ऑरल दोनों ही तरीकों से सेक्स करते थे, ऐसे प्रभावित होने वाले लोगों की संख्‍या 13 फीसदी थी।

एक दूसरे सर्वेक्षण में नौवीं कक्षा के 425 बच्चों से खुले सवाल पूछे गए। ये बच्चे एक ही एज ग्रुप के थे और उनसे पूछा गया कि उनकी आयु वर्ग के लोगों को ऑरल सेक्स क्यों करना चाहिए? यह विचार कि वैजिनल सेक्स की तुलना में यह कम जोखिमपूर्ण है, उनकी वरीयता में पांचवें नंबर पर था। उनके पहले चार कारण थे- पहला, आनंद लेना, 2 रिश्ता सुधारना, 3 लोकप्रियता हासिल करना और 4 उत्सुकता थी।

लड़के और लड़कियों के जवाबों में अंतर था जहां लड़कों को मजे लेना पहला कारण था वहीं लड़कियों का कहना था कि उनका मुख्य उद्देश्य संबंधों को सुधारना था।
सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. महेश नवाल का मानना है कि यदि दोनों पार्टनर्स को कोई संक्रामक बीमारी नहीं हो और उनके गुप्तांग पूरी स्वच्छ हों तो ऑरल सेक्स से किसी भी तरह का खतरा नहीं होता। वे इस बात पर भी जोर देते हैं कि पार्टनर की रुचि-अरुचि का भी खयाल रखा जाना चाहिए अन्यथा इससे आपके वैवाहिक अथवा प्रेम संबंध प्रभावित हो सकता है या टूट भी सकता है।

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